लूसिंग पाचेखानीविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1994
दिल बहादुर थापा (SDF) ने 1994 के विधान सभा चुनाव में 31.3% वोट पाकर लूसिंग पाचेखानी सीट जीती और जय कु. भंडारी (SSP) को 12 वोटों से हराया।
2004 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2009 से सीट नंबर 21 नाथांग-माचोंग है।
विजेता
लूसिंग पाचेखानी का फ़ैसला सिर्फ़ 0.3% के बेहद मामूली अंतर से हुआ — विजेता और दूसरे नंबर पर रहे उम्मीदवार के बीच 12 से भी कम वोटों का फ़ासला था।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
6 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | दिल बहादुर थापा | 1,49731.3% | |
| 2 | जय कु. भंडारी SSP | SSP | 1,48531.1% |
| 3 | राम चन्द्र पौड्याल वाम दल | वाम दल | 1,37828.8% |
| 4 | रूप राज राय | 3357.0% | |
| 5 | भक्ता बहादुर खुलाल निर्दलीय | निर्दलीय | 631.3% |
| 6 | भारत सिंह राय निर्दलीय | निर्दलीय | 250.5% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
नज़दीकी मुक़ाबला, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 91% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 3.54 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2009 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2009 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
लूसिंग पाचेखानी से कौन जीता, 1979–2004
SDF ने यह सीट SSP से छीन ली, जिसने इसे 1989 में जीता था; इस सीट के रिकॉर्ड में, जो 1979 से शुरू होता है, यह SDF की पहली जीत थी। 1979 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1989 के 73.8% से बढ़कर 81.3% हो गया। इसके बाद 1999 के चुनाव में यह सीट SSP ने जीती।