लंबा दौर ख़त्म

ओडिशा विधान सभा का नक्शा लोड हो रहा है…
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ओडिशा में अगला चुनाव अप्रैल–मई 2029 में होना है। ओडिशा 2029 चुनाव का अपना अनुमान बनाइए →

चुनाव की कहानी

क्या हुआ

बीजू जनता दल पहली बार सत्ता से बाहर हुआ; उसे उसकी पुरानी प्रतिद्वंद्वी पार्टी ने हराया।

भारतीय जनता पार्टी ने कुल 147 सीटों में से 78 सीटें जीतीं।

यह बहुमत के लिए काफ़ी था, ज़रूरत से 4 सीटें ज़्यादा।

सीटों में बड़े फ़ासले के बावजूद उसके मतों का अपना हिस्सा, 40.1%, बीजद के 40.2% से ज़रा-सा पीछे था।

क्या बदला

असली कहानी यह थी कि बीजद के साथ क्या हुआ, सिर्फ़ यह नहीं कि उसकी जगह किसने ली।

सीटों का सबसे बड़ा बहाव बीजद से भाजपा की ओर रहा।

तुलना की गई 147 सीटों में से 61 सीटें अकेले इसी तरह गईं; यह भारी जीत थी, और इतने लंबे समय तक सरकार चलाने वाली पार्टी के लिए करारी हार।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

राज्य भर में 74.8% पहुँचा, जो ओडिशा के किसी विधान सभा चुनाव में अब तक दर्ज सबसे ऊँचा है।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: भुवनेश्वर मध्य, ओडिशा का फ़ैसला सिर्फ़ 37 वोटों से हुआ।

दूसरी ओर, बारी, ओडिशा में 32.2% वोट रहा, जो पूरे राज्य के सबसे एकतरफ़ा परिणामों में से एक था।

साल का सबसे अच्छा मतदान प्रतिशत आठमल्लिक, ओडिशा में रहा, 86.0%।

पृष्ठभूमि

इस चुनाव के साथ राज्य सरकार चलाने वाले एक नेता का लंबा कार्यकाल ख़त्म हुआ।