एक नई क्षेत्रीय पार्टी आगे निकली
क्या हुआ
एक क्षेत्रीय पार्टी पहले आगे रहे निर्दलीयों से आगे निकल गई और सदन की सबसे बड़ी ताक़त बन गई।
मणिपुर पीपुल्स पार्टी ने 60 सीटों में से 20 सीटें जीतीं।
इसके बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस 13 सीटों के साथ रही।
फिर भी परिणाम एक और (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा रहा, 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी पीछे।
क्या बदला
पिछले चुनाव के मुक़ाबले बिना पार्टी के लड़ने वाले उम्मीदवारों की ज़मीन काफ़ी खिसक गई।
उनके कुल (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) पिछले चुनाव से 7.1 प्रतिशत अंक गिरा, और उनकी सीटें 19 से घटकर 5 रह गईं, यानी भारी गिरावट।
इस चुनाव और पिछले चुनाव के बीच सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गई थीं, इसलिए हर सीट पर हुए बदलाव गिने नहीं जा सकते।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में देखने लायक़ हैं।
साल का सबसे कड़ा मुक़ाबला लामसांग, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 1 वोट रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) साइकोट, मणिपुर में रहा, 94.2%।
मतगणना में सबसे ज़्यादा मतदाता चंदेल, मणिपुर में थे, जहाँ 16,047 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में कुछ छोटे दलों ने भी अपनी पहली सीटें जीतीं।
इनमें मणिपुर हिल्स यूनियन और कुकी नेशनल असेम्बली भी शामिल थे।