पूर्ण राज्य के रूप में मणिपुर का पहला चुनाव
क्या हुआ
नई, बड़ी विधान सभा पर किसी भी अकेली पार्टी का नियंत्रण नहीं बना; निर्दलीय उम्मीदवारों ने मिलकर किसी भी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं।
निर्दलीय के उम्मीदवारों ने कुल 60 सीटों में से 19 सीटें जीतीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 17 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
दोनों में से कोई भी 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े के क़रीब नहीं पहुँचा; यानी शुरू से ही (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
क्या बदला
यह इस इलाक़े के पूर्ण राज्य बनने के बाद पहला चुनाव था, जिसमें कहीं बड़ी विधान सभा चुनी जानी थी।
सदन की सीटें 30 से बढ़कर 60 हो गईं।
आख़िर में 6 दलों ने सीटें जीतीं, और 19 सीटें निर्दलीयों को मिलीं।
नई विधान सभा में मणिपुर पीपुल्स पार्टी और संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी/सोशलिस्ट पार्टी भी थे, दोनों ने पहली बार सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में देखने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला सिंगजमेई, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 11 वोट रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) खेकमन, मणिपुर में रहा, 89.1%।
मतगणना में सबसे ज़्यादा मतदाता करोंग, मणिपुर में थे, जहाँ 15,586 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
एक सीट बिना मुक़ाबले के जीती गई, यानी निर्विरोध, जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार मैदान में था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
पृष्ठभूमि
यह मतदान भारत के भीतर इस इलाक़े की हैसियत में हुए एक बड़े बदलाव के बाद हुआ।