बिखरे सदन में निर्दलीय सबसे ऊपर
क्या हुआ
निर्दलीय उम्मीदवारों की लहर विधान सभा में सबसे ऊपर पहुँच गई और पहले आगे रही पार्टी को पीछे छोड़ दिया।
निर्दलीय के उम्मीदवारों ने कुल 60 सीटों में से 19 सीटें जीतीं।
इसके बाद इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) रही, 13 सीटों के साथ।
फिर भी परिणाम 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी पीछे रहा; यानी एक और (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
क्या बदला
पिछली विधान सभा में सबसे आगे रही पार्टी इस बार शीर्ष पर नहीं लौटी।
निर्दलीयों की अपनी सीटें तेज़ी से बढ़ीं, 5 से 19।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 2.4 प्रतिशत अंक घटा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला कुम्बी, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 7 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, जिरीबाम, मणिपुर का परिणाम सबसे एकतरफ़ा रहा, जहाँ जीत का अंतर 36.2% वोट था।
सबसे कम मतदान प्रतिशत थंगमेइबंद, मणिपुर में रहा, 64.6%।
सबसे भरा हुआ बैलट क्षेत्रीगाओ, मणिपुर में था, जहाँ 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
मतपत्र पर कुछ नए पार्टी नाम भी पहली बार दिखे।
इनमें इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा), जनता पार्टी और इंडियन नेशनल कांग्रेस (उर्स) भी शामिल थे।