कांग्रेस बहुमत से एक सीट पीछे
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस सत्ता में बनी रही, बहुमत से थोड़ा पीछे; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा, जिसमें किसी भी अकेली पार्टी के पास अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं होतीं।
कांग्रेस ने 60 सीटों में से 30 सीटें जीतीं।
इससे यह 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से सिर्फ़ एक सीट पीछे रह गई।
अगला सबसे बड़ा हिस्सा निर्दलीय उम्मीदवारों का रहा, जिन्होंने मिलकर 10 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस बार कांग्रेस ने सत्ता किसी चुनौती देने वाले को सौंपने के बजाय अपने पास बनाए रखी।
कांग्रेस अब लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
इस बार इसने 60 में से 30 सीटें जीतीं, जो तब तक राज्य में किसी भी पार्टी की सबसे ज़्यादा सीटें थीं।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला केइराओ, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 2 वोट रहा।
करोंग, मणिपुर में 96.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला खुंद्रकपम, मणिपुर में था, जहाँ बैलट पर 12 उम्मीदवार थे।
पूरे राज्य में हर सीट पर औसतन 5.1 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
वही पार्टी सत्ता में बनी रही, फिर भी मणिपुर की विधान सभा बँटी हुई रही।
7 अलग-अलग दलों ने कम से कम एक सीट जीती।