मणिपुर की सबसे नई पार्टी ने सत्ता बचाई
क्या हुआ
कोई भी पार्टी बहुमत के क़रीब नहीं पहुँची; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
मणिपुर स्टेट कांग्रेस पार्टी ने 60 में से 23 सीटें जीतीं, जो किसी भी पार्टी से ज़्यादा थीं, लेकिन बहुमत से कम।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 11 सीटों के साथ दूसरे नंबर पर रही।
क्या बदला
सबसे ज़्यादा सीटों वाली पार्टी पहली बार अपने नाम से चुनाव लड़ रही थी, एक ऐसी विधान सभा में जो कई हिस्सों में बँटी थी।
इसने ख़ुद सिर्फ़ 23 सीटें जीतीं, ऐसे मैदान में जहाँ 11 अलग-अलग दलों ने कम से कम एक-एक सीट जीती।
लगभग 89.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो पिछले चुनाव से लगभग उतना ही था।
अहम आँकड़े
मतगणना के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला टिपाईमुख, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 14 वोट रहा।
केइराओ, मणिपुर में 95.7% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) चिंगाई, मणिपुर में रहा, जहाँ सिर्फ़ 56.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
मुक़ाबलों में भीड़ थी: हर सीट पर औसतन 6.7 उम्मीदवार थे, पूरे राज्य में कुल 401।
पृष्ठभूमि
मणिपुर की विधान सभा पहले जितनी ही बँटी रही, और कोई भी पार्टी पूरी तरह अपने दम पर सरकार नहीं बना सकी।