लगातार तीसरी बार सबसे आगे, फिर भी बहुमत नहीं
क्या हुआ
वही पार्टी फिर सबसे ज़्यादा सीटों के साथ आगे रही, हालाँकि उसकी अपनी सीटें पिछली बार से थोड़ी घटीं।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 60 सीटों में से 22 सीटें जीतीं।
इसके बाद मणिपुर पीपुल्स पार्टी 18 सीटों के साथ रही।
फिर भी परिणाम एक बार फिर 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम रहा; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
क्या बदला
वही पार्टी विधान सभा में सबसे बड़ी अकेली पार्टी बनी रही, और लगातार सबसे आगे रहने का उसका सिलसिला जारी रहा।
इसके साथ लगातार 3 चुनाव हो गए, जिनमें कांग्रेस ने सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में देखने लायक़ हैं।
पूरे राज्य में (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 90.3% तक पहुँचा, जो वहाँ अब तक हुए किसी भी चुनाव में सबसे ऊँचा है।
सबसे कड़ा मुक़ाबला कोंथौजम, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 52 वोट रहा।
दूसरी ओर, थोउबाल, मणिपुर में जीत 34.2% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे भरा हुआ बैलट थानलोन, मणिपुर में था, जहाँ 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में कुछ नए दलों ने भी अपनी पहली सीटें जीतीं।
नए आने वालों में समता पार्टी और फेडरल पार्टी ऑफ मणिपुर शामिल थे।