बहुमत से एक सीट पीछे
क्या हुआ
एक पार्टी ने राज्य में अब तक किसी भी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन अपने दम पर बहुमत से थोड़ा पीछे रह गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 60 में से 30 सीटें जीतीं, जो अब तक इसका सबसे अच्छा परिणाम था।
यह फिर भी 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से थोड़ा कम था; यानी (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
क्या बदला
भले ही वही पार्टी सबसे आगे रही, लेकिन नीचे अलग-अलग सीटों के परिणाम पिछली बार के मुक़ाबले काफ़ी बदले।
सबसे बड़े बदलाव में 9 सीटें निर्दलीय से कांग्रेस के पास चली गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी बढ़ा, पिछले चुनाव से 4.9 प्रतिशत अंक ज़्यादा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में देखने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला मोइरांग, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 26 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, तामेंगलोंग, मणिपुर में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ जीत का अंतर 22.9% वोट था।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत कांगपोकपी, मणिपुर में रहा, 92.7%।
सबसे भरा हुआ बैलट कुम्बी, मणिपुर में था, जहाँ 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में मतदान प्रतिशत राज्य के इतिहास में तब तक के किसी भी चुनाव से ज़्यादा रहा।