सबसे ज़्यादा सीटें, पर सरकार नहीं
क्या हुआ
एक पार्टी ने किसी भी दूसरी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन उसके बाद बनी सरकार की अगुवाई नहीं कर पाई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 54 सीटों में से 24 सीटें जीतीं।
इसके बाद जनता दल रही, 11 सीटों के साथ।
सबसे बड़ी पार्टी भी 28 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी पीछे रही; विधान सभा (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) थी।
क्या बदला
नई सरकार की अगुवाई एक दूसरी, छोटी पार्टी ने की, जबकि सबसे ज़्यादा सीटों वाली पार्टी ऐसा नहीं कर पाई।
सदन पहले से ज़्यादा बँटा हुआ था; 7 दलों ने सीटें जीतीं।
जनता दल पहली बार चुनाव लड़ रही थी और तुरंत दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बन गई।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला चिंगाई, मणिपुर में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 6 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, टिपाईमुख, मणिपुर में जीत 50.6% वोटों के अंतर से हुई, जो इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) माओ, मणिपुर में रहा, 97.7%।
सबसे ज़्यादा मतदाता माओ, मणिपुर में थे, जहाँ 32,457 लोग पंजीकृत मतदाता थे।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में मतदान प्रतिशत राज्य में तब तक के किसी भी चुनाव में दर्ज सबसे ऊँचा स्तर था।