चार चुनावों से सबसे आगे
क्या हुआ
सबसे बड़ी पार्टी फिर अपनी जगह पर बनी रही और बरसों से चले आ रहे सिलसिले को आगे बढ़ाया, एक (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा में।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 24 सीटें जीतीं।
यह पिछले चुनाव से 2 सीटें ज़्यादा था।
इसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 2.0 प्रतिशत अंक बढ़ा।
क्या बदला
अब तक सबसे बड़ी पार्टी का पहले स्थान पर क़ब्ज़ा एक पक्का रुझान बन चुका था।
अब यह लगातार 4 चुनावों में पहले स्थान पर रही है।
दूसरे स्थान पर रही पार्टी के लिए समय मुश्किल रहा: इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव हिल पीपल यूनियन से निर्दलीय की ओर हुआ।
6 सीटें इस तरह बदलीं।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला नोंगश्केन, मेघालय में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 45 वोट रहा।
सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला रोंगचुगिरी, मेघालय में हुआ, जहाँ जीत 37.1% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नोंगबाह-वाहियाजेर, मेघालय में रहा, 91.6%।
मैदान और बिखरता गया: हिल स्टेट पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी, ऑल पार्टी हिल लीडर्स काँफ्रेंस (आर्मिसन मारक ग्रुप), मेघालय प्रोग्रेसिव पीपुल्स पार्टी और पब्लिक डिमांड्स इम्प्लीमेंटेशन कन्वेंशन, सभी ने इस चुनाव में पहली बार विधान सभा सीटें जीतीं।
पृष्ठभूमि
इन वर्षों में क्षेत्रीय पार्टियाँ बनती रहीं; इनमें सबसे पुरानी पार्टियों में से एक राज्य के पहले चुनाव से ही मैदान में थी।