पहला स्थान बरक़रार
क्या हुआ
सबसे बड़ी पार्टी लगातार दूसरे चुनाव में इसी स्थिति में रही, और फिर से अपने दम पर सरकार बनाने लायक सीटें नहीं जीत पाई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 25 सीटें जीतीं।
यह पिछली बार जीती सीटों से 5 सीटें ज़्यादा था।
इसके अपने (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) लगभग नहीं बदला, पिछले चुनाव से सिर्फ़ 1.3 प्रतिशत अंक कम।
क्या बदला
हर सीट पर देखें तो सबसे साफ़ रुझान यह था कि सबसे बड़ी पार्टी ने वह ज़मीन हासिल की जो पहले निर्दलीयों के पास थी।
सबसे बड़े बदलाव में सीटें निर्दलीय से कांग्रेस के पास गईं।
5 सीटें इसी तरह बदलीं।
इस चुनाव में निर्दलीयों की स्थिति भी कुल मिलाकर ढह गई।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला नोंगबाह-वाहियाजेर, मेघालय में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 31 वोट रहा।
सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला बाघमारा, मेघालय में हुआ, जहाँ जीत 57.0% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) फुलबाड़ी, मेघालय में रहा, 85.3%।
एक बिल्कुल नई पार्टी, पब्लिक डिमांड्स इम्प्लीमेंटेशन कन्वेंशन, ने भी अपनी जगह बनाई और पहली बार सीटें जीतीं।
पृष्ठभूमि
विधान सभा की कुल तस्वीर जानी-पहचानी रही: एक पार्टी आगे, लेकिन अब भी अकेले सरकार बनाने से पीछे।