रिकॉर्ड मतदान प्रतिशत, जाना-पहचाना अगुवा
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस एक बार फिर मेघालय की सबसे बड़ी पार्टी बनी रही।
लगभग 89.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो राज्य में दर्ज सबसे ऊँचा स्तर है।
उसने कुल 60 सीटों में से 25 सीटें जीतीं।
यह 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी ने 20.8% वोट पाकर 15 सीटें हासिल कीं।
ख़ुद कांग्रेस को 32.9% वोट मिले, जो 41.7% सीटों में बदल गए।
चुनाव प्रचार
भारत निर्वाचन आयोग ने 14 जनवरी 2008 को आठवीं मेघालय विधान सभा के चुनाव की घोषणा की; राज्य की 60 में से ज़्यादातर सीटों पर एक ही चरण में मतदान और 7 मार्च को गिनती तय हुई।1
नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के नेता संगमा ने विधान सभा चुनाव लड़ने के लिए मार्च 2008 में अपनी लोक सभा सीट से इस्तीफ़ा दिया और राष्ट्रीय राजनीति से राज्य की राजनीति में आ गए। उनकी अगुवाई में पार्टी को सत्ताधारी कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती माना गया।2
बाघमारा में मतदान पहले बाक़ी राज्य के साथ ही होना था, लेकिन वहाँ के मौजूदा कांग्रेस विधायक के निधन के बाद आयोग ने इसे 22 मार्च तक टाल दिया, जबकि बाक़ी 59 सीटों की गिनती तय समय पर हुई।3
क्या बदला
कांग्रेस शीर्ष पर बनी रही, और राज्य की सबसे पुरानी क्षेत्रीय पार्टियों में से एक ने फिर सीटें जीतीं।
हिल स्टेट पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ़्रेंस से टूटकर बनी थी, शुरू में अलग पहाड़ी राज्य के लिए अभियान चलाती थी, और मेघालय के पहले विधान सभा चुनाव से हर चुनाव में उतरी थी।4
ख़ुद कांग्रेस की सीटें 22 से बढ़कर 25 हो गईं।
इससे सबसे ऊपर रहने का उसका सिलसिला लगातार 7 चुनावों तक पहुँच गया।
सबसे बड़ा बदलाव यूनाइटेड डेमोक्रेटिक पार्टी से कांग्रेस की ओर रहा: जिन 38 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 6 इसी तरह बदलीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 19.0 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
सबसे क़रीबी मुक़ाबला डिएंगलिएंग, मेघालय में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 66 वोट रहा।
जायाव, मेघालय में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ जीत 53.2% वोटों के अंतर से हुई।
उस साल किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत रालियांग, मेघालय में दर्ज हुआ, 95.9%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से तुरा, मेघालय सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, मतदाता सूची में 39,698 नाम थे।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला रोंगराम, मेघालय में था, जहाँ 11 उम्मीदवार मैदान में थे।
मौजूदा विधायक के निधन के बाद बाघमारा का मतदान 22 मार्च तक टाल दिया गया, जबकि बाक़ी 59 सीटों की गिनती 7 मार्च को हुई।3
पृष्ठभूमि
मेघालय 21 जनवरी 1972 को असम के खासी, जयंतिया और गारो हिल्स ज़िलों से अलग होकर राज्य बना, और कुछ ही हफ़्तों बाद इसकी पहली विधान सभा का चुनाव हुआ, जिसमें सभी 60 सदस्य चुने गए और ऑल पार्टी हिल लीडर्स कॉन्फ़्रेंस को पूरा बहुमत मिला।5
तब से राज्य की कई क्षेत्रीय पार्टियों के बीच (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) बनाना सरकार चलाने का केंद्र बना हुआ है, मतदान प्रतिशत चाहे जो रहा हो।