बहुमत से थोड़ा पीछे
क्या हुआ
कांग्रेस ने एक बार फिर किसी भी दूसरी पार्टी से ज़्यादा सीटें जीतीं, लेकिन बहुमत थोड़ी दूरी पर रह गया।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 60 सीटों में से 29 सीटें जीतीं।
यह 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से थोड़ा ही कम था।
निर्दलीय उम्मीदवार 13 सीटों के साथ उसके बाद रहे।
क्या बदला
इसी साल एक बिल्कुल नई पार्टी पहली बार मेघालय के राजनीतिक नक्शे पर आई और अपने पहले ही चुनाव में सीटें जीतीं।
वह पार्टी थी एनपीपी।
उधर कांग्रेस ने शीर्ष पर अपना सिलसिला लगातार 8 चुनावों तक बढ़ाया।
निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी कुल मिलाकर 13 सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर मेंदीपाथर, मेघालय में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 11 वोट रहा।
दूसरी ओर, अम्पाती, मेघालय में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 41.6% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) ख्लीहरियात, मेघालय में रहा, 94.4%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता मावलाई, मेघालय में थे, मतदाता सूची में 34,199 नाम थे।
पृष्ठभूमि
मेघालय के चुनावों में नई, ग़ैर-पारंपरिक पार्टियों का उभार बार-बार दिखता रहा है, और साथ ही बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवार भी।