पहला चुनाव
क्या हुआ
पहाड़ी ज़िलों की नुमाइंदगी करने वाले एक क्षेत्रीय (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) ने नई विधान सभा में सरकार चलाने लायक बहुमत हासिल किया।
ऑल पार्टी हिल लीडर्स काँफ्रेंस ने 32 सीटें जीतीं।
यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से सिर्फ़ 1 सीटें ज़्यादा था।
क्या बदला
यह राज्य का सबसे पहला चुनाव था, जो इसके अलग राज्य बनने के ठीक बाद हुआ।
मेघालय ने उस दिन विधान सभा की सभी 60 सीटों के लिए प्रतिनिधि चुने।
सिर्फ़ 3 दलों ने कोई सीट जीती; बाक़ी में से 19 सीटें बिना पार्टी टिकट के लड़ने वाले निर्दलीयों ने जीतीं।
अहम आँकड़े
उस पहले चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ी टक्कर नोंगख्लाव, मेघालय में हुई, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 30 वोट रहा।
दूसरे छोर पर, डम्बुक आगा, मेघालय का परिणाम सबसे एकतरफ़ा रहा, जहाँ जीत का अंतर 75.6% वोट था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मिनसोरालियांग, मेघालय में रहा, 74.1%।
किसी एक पार्टी के बजाय अलग-अलग लड़ने वाले निर्दलीयों के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) असल में ऑल पार्टी हिल लीडर्स काँफ्रेंस से ज़्यादा रहा, 35.7% के मुक़ाबले 53.9%, भले ही उन्होंने बहुत कम सीटें जीतीं।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव भारत के पूर्वोत्तर के एक बड़े पुनर्गठन के बाद हुआ, जब कई पहाड़ी ज़िलों को अलग करके यह नया राज्य बनाया गया।