एक नया प्रतिद्वंद्वी आया
क्या हुआ
सबसे बड़ी पार्टी लगातार तीसरे चुनाव में अपनी जगह पर बनी रही, लेकिन एक बिल्कुल नई क्षेत्रीय पार्टी तुरंत उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी बन गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने इस बार 22 सीटें जीतीं, जो पिछले चुनाव की 25 सीटों से कम थीं।
इसकी सबसे नई चुनौती, हिल पीपल यूनियन, ने अपने पहले ही चुनाव में 19 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव का सबसे साफ़ रुझान ज़्यादातर चुनावों से उलटा था: सीटें ख़ुद सबसे बड़ी पार्टी के हाथ से निकलीं।
सबसे बड़े बदलाव में सीटें कांग्रेस से हिल पीपल यूनियन के पास गईं।
7 सीटें इसी तरह बदलीं।
इस साल राज्य की दो पुरानी पार्टियों की स्थिति भी ढह गई।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अपने आप में जानने लायक़ हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला खेरापारा, मेघालय में हुआ, जहाँ पहले दो उम्मीदवारों के बीच (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 0 वोट था, यानी लगभग बराबरी।
सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला पारियोंग, मेघालय में हुआ, जहाँ जीत 48.1% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नोंगबाह-वाहियाजेर, मेघालय में रहा, 90.7%।
सबसे ज़्यादा मतदाता नोंगस्टोइन, मेघालय में थे, जहाँ मतदाता सूची में 23,371 लोग थे।
पृष्ठभूमि
राज्य के दलों की तस्वीर हर चुनाव में बदलती रही, और नई क्षेत्रीय पार्टियाँ बार-बार पुरानी पार्टियों की जगह लेती रहीं।