मावप्रेमविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1993
ध्रुब नाथ जोशी (INC) ने 1993 के विधान सभा चुनाव में 31.7% वोट पाकर मावप्रेम सीट जीती और एच. आइओंटिस खरफुली (BJP) को 499 वोटों से हराया।
1978 के चुनाव से पहले सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1972 में सीट नंबर 21 डिएंगलिएंग थी। 2008 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 2013 से सीट नंबर 21 नोंगथिम्मई है। इस इलाक़े के पहले के परिणामों के लिए सीट का इतिहास देखें।
विजेता
5.2% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
9 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ध्रुब नाथ जोशी | 3,06231.7% | |
| 2 | एच. आइओंटिस खरफुली | 2,56326.5% | |
| 3 | बीर बहादुर छेत्री निर्दलीय | निर्दलीय | 1,94420.1% |
| 4 | हुमबॉय शुल्लई निर्दलीय | निर्दलीय | 1,22312.7% |
| 5 | के.एम. वर्जरी HPSD | HPSD | 5665.9% |
| 6 | तनलिहोक थाम निर्दलीय | निर्दलीय | 1411.5% |
| 7 | हेरेफोर्ड एस. सावियन MPP | MPP | 941.0% |
| 8 | जुस्ना कुर्बेह निर्दलीय | निर्दलीय | 570.6% |
| 9 | पी.के. शर्मा निर्दलीय | निर्दलीय | 160.2% |
ज़मानत ज़ब्त: उम्मीदवार को कुल वैध वोटों के छठे हिस्से से कम वोट मिले, इसलिए जन प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 158 के तहत उसकी ज़मानत राशि ज़ब्त हो जाती है।
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 78% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 4.33 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 2013 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 2013 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
राज्य के आँकड़े पूछें
RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।
मावप्रेम से कौन जीता, 1978–2008
1978 से यहाँ हर चुनाव INC ने जीता है: यह लगातार उसकी चौथी जीत थी। उसे मिले वोटों का प्रतिशत 58.0% से घटकर 31.7% रह गया। 1978 से अब तक यहाँ के किसी भी चुनाव में यह सबसे कड़ा मुक़ाबला था। मतदान प्रतिशत 1988 के 65.4% से घटकर 64.6% रह गया। इसके बाद 1998 के चुनाव में भी INC ने यह सीट अपने पास रखी।