दिल्ली में कांग्रेस का दूसरा कार्यकाल
क्या हुआ
कांग्रेस ने दिल्ली में दूसरा कार्यकाल जीता और भाजपा की चुनौती को पीछे छोड़ा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 70 सीटों में से 47 सीटें जीतीं।
यह जीत उसे 48.1% (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) के साथ मिली।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी ने 20 सीटें जीतीं।
क्या बदला
कांग्रेस ने दिल्ली पर नियंत्रण बनाए रखा, लेकिन पहली बार के मुक़ाबले कम गुंजाइश के साथ।
इसके साथ पार्टी लगातार 2 चुनाव जीत चुकी थी।
उसकी अपनी सीटें थोड़ी घटीं: पिछले चुनाव की 52 से इस बार 47।
सबसे बड़ा बदलाव कांग्रेस से भाजपा की ओर हुआ, जिसमें 10 सीटें गईं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला साकेत, दिल्ली में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 121 वोट रहा।
उस रात की सबसे बड़ी जीत मंगोलपुरी, दिल्ली में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 52.9% वोट आगे रहे।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मोती नगर, दिल्ली में दर्ज हुआ, 62.3%।
सबसे लंबी मतदाता सूची बादली, दिल्ली की थी, जिसमें 2,71,032 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव ऐसी विधान सभा के लिए हुआ, जो दिल्ली के लिए अभी अपेक्षाकृत नई थी।