दिल्ली की पहली विधान सभा
क्या हुआ
दिल्ली ने अपनी पहली विधान सभा चुनी, और परिणाम एक पार्टी की साफ़ जीत रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 48 सीटों में से 39 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी अखिल भारतीय जनसंघ सिर्फ़ 5 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
दिल्ली की कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, जहाँ एक ही मुक़ाबले से विधान सभा के लिए एक से ज़्यादा सदस्य चुने जाते थे।
42 निर्वाचन क्षेत्रों में से 6 इसी तरह काम करते थे।
इन सबसे मिलकर विधान सभा की सभी 48 सीटें भरीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कंझावला, दिल्ली में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 24 रहा।
दूसरी ओर, सफदरजंग, दिल्ली में जीत 66.8% वोटों के अंतर से हुई।
सबसे ज़्यादा मतदाता रैगरपुरा देव नगर, दिल्ली में थे, जहाँ 31,019 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला महरौली, दिल्ली में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 13 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
बाद में दिल्ली का दर्जा बदल गया, जब देशव्यापी पुनर्गठन में इस विधान सभा की जगह सीधा केंद्रीय प्रशासन आ गया।