दिल्ली 1993 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
BJP: 49 सीटें (70.0%)INC: 14 सीटें (20.0%)JD: 4 सीटें (5.7%)IND: 3 सीटें (4.3%)बहुमत के लिए 3670सरकार बनाने के लिए 36
  • BJP4970.0%
  • INC1420.0%
  • JD45.7%
  • निर्दलीय34.3%
चुनाव की कहानी

विधान सभा की वापसी, भाजपा की पहली जीत

क्या हुआ

दिल्ली की फिर से बहाल हुई विधान सभा का पहला चुनाव हुआ, जिससे लंबे समय से चला आ रहा सीधा केंद्रीय शासन ख़त्म हुआ।

भारतीय जनता पार्टी ने कुल 70 सीटों में से 49 सीटें जीतीं, यह एकतरफ़ा जीत थी।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 14 सीटें जीतीं।

क्या बदला

शहर की पहले वाली विधान सभा भंग होकर सीधे केंद्रीय प्रशासन के हाथ में जाने के बाद यह दिल्ली का पहला विधान सभा चुनाव था।

भाजपा परिषद के आख़िरी चुनाव की 19 सीटों से बढ़कर विधान सभा के पहले चुनाव में 49 सीटों पर पहुँची।

परिषद के आख़िरी चुनाव से 6.9 प्रतिशत अंक बढ़ा।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला आदर्श नगर, दिल्ली में हुआ, जहाँ सिर्फ़ 40 रहा।

दूसरी ओर, मटिया महल, दिल्ली में जीत 45.3% वोटों के अंतर से हुई।

सबसे ज़्यादा मतदाता हस्तसाल, दिल्ली में थे, जहाँ 1,13,909 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला नसीरपुर, दिल्ली में था, जहाँ 45 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

इसके साथ दिल्ली महानगर परिषद का दौर भी ख़त्म हुआ, जो सिर्फ़ सलाह देने वाली भूमिका में काम करती थी।

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