रिकॉर्ड मतदान, जाना-पहचाना विजेता
क्या हुआ
राष्ट्रीय स्तर पर टूट के बाद नए नाम से चुनाव लड़ रही इंडियन नेशनल कांग्रेस फिर भी आसानी से जीती।
(दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के नाम से लड़ रही कांग्रेस ने 56 में से 44 सीटें जीतीं — एक भारी जीत।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनसंघ सिर्फ़ 5 सीटें जीत सकी।
क्या बदला
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) दिल्ली के अब तक दर्ज किसी भी चुनाव में सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचा।
उस दिन 67.9% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला — शहर के इतिहास के किसी भी और चुनाव से ज़्यादा।
कांग्रेस ने 44 सीटों के साथ शहर में तब तक की अपनी सबसे अच्छी सीट संख्या की बराबरी भी की।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
भारतीय जनसंघ के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 38.5% रहा, लेकिन यह सिर्फ़ 5 सीटों में बदल पाया।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला नजफगढ़, दिल्ली में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 52 रहा।
तिमारपुर, दिल्ली में मतदान प्रतिशत 94.1% रहा, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से रामकृष्णपुरम, दिल्ली सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 90,923 नाम थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव दिल्ली महानगर परिषद के लिए था, जिसके पास सीधे शासन का अधिकार नहीं, बल्कि सिर्फ़ सलाह देने के अधिकार थे।