बम्बई 1951 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 270 सीटें (85.2%)IND: 19 सीटें (6.0%)PWP: 14 सीटें (4.4%)SP: 9 सीटें (2.8%)KKP: 2 सीटें (0.6%)CPI: 1 सीट (0.3%)KLP: 1 सीट (0.3%)SCF: 1 सीट (0.3%)बहुमत के लिए 159317सरकार बनाने के लिए 159
  • INC27085.2%
  • निर्दलीय196.0%
  • PWP144.4%
  • SP92.8%
  • KKP20.6%
  • CPI10.3%
  • KLP10.3%
  • SCF10.3%
चुनाव की कहानी

बम्बई का पहला चुनाव

क्या हुआ

बम्बई के पहले विधान सभा चुनाव में इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भारी जीत दर्ज की।

उसने 317 में से 270 सीटें जीतीं — साफ़ तौर पर बहुत बड़ा बहुमत।

उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय 19 सीटों के साथ बहुत पीछे रही।

इससे कांग्रेस के पास साधारण बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 111 सीटें ज़्यादा थीं।

क्या बदला

यह बम्बई राज्य में हुआ पहला विधान सभा चुनाव था।

उस साल की कुछ सीटें बहु-सदस्यीय थीं, यानी एक ही मुक़ाबले से एक से ज़्यादा प्रतिनिधि चुने जाते थे।

268 निर्वाचन क्षेत्रों में से 47 में दो-दो सदस्य चुने गए।

और 1 सीट इससे भी आगे गई, जहाँ से दो की जगह तीन सदस्य चुने गए — उस साल राज्य की इकलौती तीन-सदस्यीय सीट।

कुल मिलाकर विधान सभा के सदस्यों की संख्या बढ़कर 317 हो गई।

अहम आँकड़े

चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला पाटन, बम्बई में हुआ, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 99 वोटों से हुआ।

सबसे बड़ी जीत संखेडा, बम्बई में हुई, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 62.5% आगे रहा।

उस साल नासिक इगतपुरी, बम्बई में सबसे ज़्यादा 1,62,645 पंजीकृत मतदाता थे, और यहीं इस चुनाव का सबसे भीड़ भरा मुक़ाबला भी हुआ — कुल 17 उम्मीदवार।

पूरे राज्य में लगभग 52.6% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।

पृष्ठभूमि

बम्बई की विधान सभा की शुरुआत इसी चुनाव से हुई; यह राज्य की पहली जनता द्वारा चुनी गई विधान सभा थी।

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RBI 2024-25

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