कुर्ला बांद्रा (पूर्व)विधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
ओझा, इंद्रवदन मनमोहनराय (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 45.5% वोट पाकर कुर्ला बांद्रा (पूर्व) सीट जीती और कुलकर्णी, राजाभाऊ गोपाल (SP) को 2,318 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 265 बालापुर है।
विजेता
7.9% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | ओझा, इंद्रवदन मनमोहनराय | 13,36645.5% | |
| 2 | कुलकर्णी, राजाभाऊ गोपाल SP | SP | 11,04837.6% |
| 3 | नलावडे, रघुनाथ भाऊराव निर्दलीय | निर्दलीय | 2,0256.9% |
| 4 | भालेकर, शांताराम, तुकाराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,1854.0% |
| 5 | कोपरकर, गंगाधर नारायण RRP | RRP | 8853.0% |
| 6 | सिंह, हनुमान सरन KMPP | KMPP | 3451.2% |
| 7 | गायकवाड, लक्ष्मण नाथूजी निर्दलीय | निर्दलीय | 2650.9% |
| 8 | पाहुजा, दीनानाथ निर्दलीय | निर्दलीय | 2380.8% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, दो से तीन दलों का मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
INC, SP और एक निर्दलीय को 90% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 2.81 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1957 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1957 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।