दापोली खेडविधान सभा चुनाव का परिणाम, 1951–52
पारकर वजुद्दीन अहमद (INC) ने 1951–52 के विधान सभा चुनाव में 33.3% वोट पाकर दापोली खेड सीट जीती और पाटणे जगन्नाथ शिवराम (SCF) को 3,137 वोटों से हराया।
1951 के बाद सीटों की सीमाएँ नए सिरे से तय की गईं। 1957 से सीट नंबर 188 पन्हाला है।
विजेता
13.1% के अंतर से साफ़ जीत।
सीट का इतिहास
सभी उम्मीदवार
8 उम्मीदवार| # | उम्मीदवार | पार्टी | मिले वोट · %मतों का हिस्सा |
|---|---|---|---|
| 1 | पारकर वजुद्दीन अहमद | 8,00433.3% | |
| 2 | पाटणे जगन्नाथ शिवराम | 4,86720.3% | |
| 3 | करंदीकर शिवराम लक्ष्मण निर्दलीय | निर्दलीय | 3,44114.3% |
| 4 | तांबे मुहम्मद अमीन वजीर मोहम्मद निर्दलीय | निर्दलीय | 2,1999.2% |
| 5 | मोरे वसंत आत्माराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,8997.9% |
| 6 | रखंगे सेख उमान सेख अब्दुल्ला निर्दलीय | निर्दलीय | 1,3095.5% |
| 7 | सकपाल गणपत काशीराम निर्दलीय | निर्दलीय | 1,2265.1% |
| 8 | फाटक भार्गव महादेव निर्दलीय | निर्दलीय | 1,0644.4% |
परिणाम पूरे हैं; इस सीट के चुनावी हलफ़नामों की जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है।
साफ़ जीत, कई दलों में बँटा मुक़ाबला।
यह सीट कितनी पक्की है?
जीत का अंतर, कुल वोटों के प्रतिशत में
कितने लोगों ने वोट डाला?
पंजीकृत मतदाताओं में से
मुक़ाबले में असल में कितने दल थे?
सबसे आगे के तीन दलों को 68% वोट मिले।
मुक़ाबले में दलों की प्रभावी संख्या 5.13 दलों की प्रभावी संख्या — यह हर दल को उसके मतों के हिस्से के हिसाब से गिनती है।
सदन में किसके पास कितनी सीटें?
वोट किस तरह बँटे?
यह सीट नंबर 1957 से दोबारा इस्तेमाल हुआ है। हमारे पास मौजूद ज़िले के आँकड़े इस सीट को 1957 से लड़ी गई सीट मानते हैं, इसलिए पहले के चुनावों के लिए ये नहीं दिखाए जाते।
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RBI 2024-25ये आँकड़े पूरे राज्य के हैं, इस सीट के नहीं।