कांग्रेस सरकार गिरी, नया गठबंधन आया
क्या हुआ
मतदाताओं के वोट डालने से पहले ही इंडियन नेशनल कांग्रेस की सरकार गिर गई थी; इसके बाद ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस ने एक नए (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) के हिस्से के रूप में पुडुचेरी में सत्ता संभाली।
उसने अपने दम पर 30 में से 10 सीटें जीतीं — (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा।
इसके बजाय उसने एनडीए गठबंधन के ज़रिए सरकार चलाई, जिसके पास 16 सीटें थीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने 6 सीटें जीतीं।
चुनाव प्रचार
इससे पहले के हफ़्तों में दो मंत्रियों समेत कांग्रेस के पाँच विधायकों और द्रमुक के एक विधायक ने पुडुचेरी विधान सभा से इस्तीफ़ा दे दिया, और उपराज्यपाल ने विश्वास मत कराया, जिसमें नारायणसामी सरकार हार गई। मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी ने 22 फ़रवरी को इस्तीफ़ा दिया, और विधान सभा चुनाव से पहले 25 फ़रवरी को पुडुचेरी में राष्ट्रपति शासन लगा दिया गया।1
इसके बाद पूर्व मुख्यमंत्री एन. रंगसामी की अगुवाई वाली एआईएनआरसी ने मिलकर चुनाव लड़ने के लिए भाजपा और अन्नाद्रमुक के साथ सीटों के बँटवारे का समझौता किया। समझौते के तहत एआईएनआरसी ने 30 में से 16 सीटों पर चुनाव लड़ा, और बाक़ी 14 सीटें उसके दोनों सहयोगियों में बँटीं।2
उधर कांग्रेस ने द्रमुक, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया और विडुथलाई चिरुथैगल कच्ची के साथ संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के हिस्से के रूप में चुनाव लड़ा। 6 अप्रैल के मतदान से पहले उसने 14 सीटों पर और द्रमुक ने 13 सीटों पर उम्मीदवार उतारे।3
क्या बदला
इसके बाद कांग्रेस का समर्थन मतपेटी में भी ढह गया।
सबसे बड़ा बदलाव कांग्रेस से भारतीय जनता पार्टी की ओर रहा: जिन 22 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 5 इसी तरह बदलीं।
ख़ुद एआईएनआरसी की सीटें इस बार 8 से बढ़कर 10 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 3.2 प्रतिशत अंक गिरा।
अहम आँकड़े
सबसे क़रीबी मुक़ाबला कराईकल उत्तर, पुडुचेरी में हुआ, जिसका फ़ैसला 135 वोटों से हुआ।
इंदिरा नगर, पुडुचेरी में इस चुनाव का सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) रहा: 63.4% वोट।
यानम, पुडुचेरी में प्रदेश का सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ: 91.0%।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से विल्लियनूर, पुडुचेरी सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जहाँ मतदाता सूची में 43,297 नाम थे।
(इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 10,803 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.3%।
5 दलों ने कम से कम एक सीट जीती, और 6 और सीटें निर्दलीयों को मिलीं।
पृष्ठभूमि
मुख्यमंत्री रह चुके एन. रंगसामी ने 2011 में इंडियन नेशनल कांग्रेस छोड़कर ऑल इंडिया एन.आर. कांग्रेस बनाई।4
उस साल यह नई पार्टी अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में पुडुचेरी का चुनाव लड़ी और सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं।4
प्रदेश की 30 विधान सभा सीटों की सीमाएँ आख़िरी बार 2008 में नए सिरे से तय की गई थीं, जब कुल सीटें और अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित पाँच सीटें वैसी ही रखी गईं।5