अन्नाद्रमुक का दूसरा कार्यकाल
क्या हुआ
पुडुचेरी में पहले से सरकार चला रही पार्टी सत्ता में बनी रही, हालाँकि बहुमत से थोड़ा पीछे रही।
ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने 14 सीटें जीतीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) 31.0% रहा।
क्या बदला
यह एक नई बनी पार्टी का भी यहाँ पहला चुनाव था, जो अपने पहले ही मुक़ाबले में दूसरे स्थान पर रही।
जनता पार्टी ने 7 सीटें जीतीं।
इससे वह ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम से बस थोड़ा ही पीछे रही।
फिर भी यह (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा थी, जो 16 सीटों के आँकड़े से कम रही।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला माहे, पुडुचेरी में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 12 वोट रहा।
दूसरी ओर, थट्टांचावडी, पुडुचेरी में उस रात का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 31.1% वोट से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) मन्नाडिपेट, पुडुचेरी में रहा, 85.2%।
सबसे कम मतदान प्रतिशत राज भवन, पुडुचेरी में रहा, 56.8%।
पृष्ठभूमि
पुडुचेरी के चुनाव लंबे समय से कांग्रेस और पड़ोसी तमिलनाडु के द्रविड़ दलों की आपसी होड़ के साथ चलते आए हैं।