मुख्यमंत्री की नई पार्टी ने पुडुचेरी जीता
क्या हुआ
मतदान से कुछ महीने पहले बनी ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस अपने पहले ही मुक़ाबले में पुडुचेरी के विधान सभा चुनाव में सबसे आगे रही, और मौजूदा इंडियन नेशनल कांग्रेस सरकार को हटा दिया।
उसने 30 में से 15 सीटें जीतीं — अपने दम पर बहुमत से कम।
सहयोगियों के साथ मिलकर उसके पास 20 सीटें थीं, जो इस केंद्र शासित प्रदेश में सरकार बनाने के लिए काफ़ी थीं।
कांग्रेस 25.3% वोट के साथ 7 सीटों पर सिमट गई।
चुनाव प्रचार
पुडुचेरी के मौजूदा मुख्यमंत्री रंगसामी ने इंडियन नेशनल कांग्रेस से इस्तीफ़ा दिया, और 7 फ़रवरी 2011 को पांडिचेरी में नई पार्टी के मुख्यालय पर उसकी घोषणा की: ऑल इंडिया एन आर कांग्रेस (एआईएनआरसी)।1
सरकार को चुनौती देने के लिए रंगसामी ने अपनी नई पार्टी का (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) अन्नाद्रमुक, माकपा, भाकपा और देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम के साथ किया; इसमें एआईएनआरसी 17 सीटों पर और अन्नाद्रमुक 10 सीटों पर लड़ी।2
ख़ुद 17 सीटों पर लड़ रही कांग्रेस ने एक प्रतिद्वंद्वी गठबंधन की अगुवाई की, जिसमें द्रमुक 10 सीटों पर, पट्टाली मक्कल काची 2 पर और विडुथलाई चिरुथैगल कच्ची 1 सीट पर लड़ी; इस गठबंधन ने मौजूदा मुख्यमंत्री वैथिलिंगम का समर्थन किया।3
भारतीय जनता पार्टी किसी भी गठबंधन में शामिल नहीं हुई और अकेले लड़ी; उसके उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय नेताओं नितिन गडकरी और सुषमा स्वराज ने प्रचार किया।4
26 मार्च को नामांकन बंद होने से पहले रंगसामी ने ख़ुद इंदिरा नगर और कदिरकामम, दोनों सीटों से नामांकन भरा; इस केंद्र शासित प्रदेश के इतिहास में यह पहली बार था जब किसी उम्मीदवार ने एक से ज़्यादा सीटों से चुनाव लड़ा। मतदान 13 अप्रैल को और मतगणना 13 मई को हुई।56
क्या बदला
यह पुडुचेरी की 2008 में नए सिरे से तय की गई सीमाओं पर हुआ पहला चुनाव था।7
इसने इस केंद्र शासित प्रदेश की सरकार में कांग्रेस की अगुवाई का सिलसिला भी ख़त्म कर दिया।
इस चुनाव से पहले कांग्रेस लगातार 6 चुनाव जीत चुकी थी।
एआईएनआरसी पिछले चुनाव के समय मौजूद ही नहीं थी — वह 0 सीटों से इस बार 15 सीटों पर पहुँची।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) घटकर 84.7% रह गया।
अहम आँकड़े
सबसे करीबी मुक़ाबला: नेरवी टी. आर. पट्टिनम, पुडुचेरी का फ़ैसला 358 वोटों से हुआ — उस साल पूरे प्रदेश में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा)।
दूसरी ओर, एम्बलम, पुडुचेरी 93.7% वोट के अंतर से जीती गई — इसी सीट पर उस साल सभी सीटों में सबसे कम मतदान प्रतिशत भी दर्ज हुआ: 50.0%।
यानम, पुडुचेरी में प्रदेश का सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 95.8%, और यहीं सबसे ज़्यादा उम्मीदवार भी थे: 10।
अरियांकुप्पम, पुडुचेरी पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से प्रदेश की सबसे बड़ी सीट थी, जिसकी मतदाता सूची में 30,970 नाम थे।
पृष्ठभूमि
पुडुचेरी 1963 में केंद्र शासित प्रदेश बना, जब फ़्रांस के पुराने भारतीय इलाक़ों — पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम — को 30 सदस्यों वाली एक निर्वाचित विधान सभा के तहत मिला दिया गया।8
2008 में (सीटों की सीमाओं को सरकारी तौर पर नए सिरे से खींचना, जो भारत की जनसंख्या में बदलाव के साथ समय-समय पर होता है) की नई प्रक्रिया के तहत इसकी 30 सीटों की सीमाएँ फिर से नए सिरे से तय की गईं, जिनका पहली बार इस्तेमाल इसी चुनाव में हुआ; प्रदेश की कुल सीटें और आरक्षित सीटों का बँटवारा वही रहा।7
निर्दलीयों को एक समूह गिनें तो इस बार 5 दलों ने कम से कम एक सीट जीती; निर्दलीयों को 1 सीटें मिलीं।