पुडुचेरी का पहला चुनाव
क्या हुआ
पुडुचेरी के पहले विधान सभा चुनाव से एक पार्टी की पूर्ण बहुमत वाली सरकार बनी, जिसे किसी सहयोगी दल की ज़रूरत नहीं थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 30 सीटों में से 21 सीटें जीतीं।
यह 16 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 5 सीटें ज़्यादा था — सदन में भारी बहुमत।
उसके सबसे करीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय के उम्मीदवारों का एक समूह था, जिन्होंने सिर्फ़ 5 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह पुडुचेरी का पहला चुनाव था, इसलिए तुलना के लिए कहीं भी पहले के कोई परिणाम नहीं थे।
इस चुनाव में एक निर्विरोध जीत भी हुई — यानी ऐसी सीट जहाँ सिर्फ़ एक उम्मीदवार खड़ा था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
इस केंद्र शासित प्रदेश की 30 सीटों में से सिर्फ़ 1 का फ़ैसला इस तरह हुआ।
अहम आँकड़े
पुडुचेरी के पहले चुनाव के कुछ आँकड़े ध्यान खींचते हैं।
सदन पर पूरा नियंत्रण होने के बावजूद कांग्रेस के (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) सिर्फ़ 52.1% था।
माहे, पुडुचेरी का फ़ैसला सिर्फ़ 13 वोटों से हुआ।
इस चुनाव में सबसे अच्छा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पल्लूर, पुडुचेरी में रहा, 91.2%।
दूसरी ओर, नेट्टपाक्कम, पुडुचेरी में उस रात की सबसे बड़ी जीत हुई, जहाँ विजेता 67.1% वोट से आगे रहा।
पृष्ठभूमि
एक नई विधान सभा के लिहाज़ से मैदान बड़ा था: कई दल और निर्दलीय उम्मीदवार उपलब्ध सीटों के लिए आमने-सामने थे।