द्रमुक की भारी जीत के साथ वापसी
क्या हुआ
पुडुचेरी में सत्ता बदल गई, और एक नई पार्टी सबसे आगे रही।
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम ने 14 सीटें जीतीं।
पार्टी के पिछले प्रदर्शन के मुक़ाबले यह 11 सीटों की बढ़त थी।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) बढ़कर 27.7% हो गया।
क्या बदला
यह भारी जीत वाला चुनाव था। ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम का समर्थन ढह गया, और दूसरा स्थान पहली बार चुनाव लड़ रहे कांग्रेस के एक गुट को मिला।
इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) ने यहाँ अपने पहले ही चुनाव में 10 सीटें जीतीं।
द्रमुक के अपने मतों का हिस्सा पिछले चुनाव के मुक़ाबले 14.2 प्रतिशत अंक बढ़ा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला पल्लूर, पुडुचेरी में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 100 वोट रहा।
लॉसपेट, पुडुचेरी में विजेता का जीत का अंतर 60.1% वोट तक पहुँचा, जो इस चुनाव में सबसे बड़ा था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) नेट्टपाक्कम, पुडुचेरी में रहा, 87.1%।
सबसे ज़्यादा मतदाता मुथियालपेट, पुडुचेरी में थे, कुल 15,512 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
कांग्रेस, द्रमुक और अन्नाद्रमुक पुडुचेरी में बार-बार सत्ता की अदला-बदली करती रही हैं, जो पड़ोसी तमिलनाडु की राजनीति की झलक है।