कांग्रेस बीच की ज़मीन पर कायम
क्या हुआ
भीड़ भरे मैदान में कांग्रेस पुडुचेरी की सबसे बड़ी अकेली पार्टी बनी रही और एक और कार्यकाल के लिए सत्ता में टिकी रही।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने 30 में से 11 सीटें जीतीं, जो पिछले चुनाव से थोड़ी बढ़त थी।
कोई भी पार्टी अपने दम पर बहुमत के करीब नहीं पहुँची, इसलिए उसने सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार चलाई।
द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम 7 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।
क्या बदला
कांग्रेस ने एक और कार्यकाल के लिए पुडुचेरी की राजनीति में शीर्ष पर अपनी जगह बनाए रखी, और बरसों से चला आ रहा सिलसिला आगे बढ़ाया।
कांग्रेस पिछले चुनाव की 9 सीटों से बढ़कर इस चुनाव में 11 सीटों पर पहुँची।
इसके साथ केंद्र शासित प्रदेश में वह लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी।
पुदुच्चेरी मक्कल कांग्रेस ने भी यहाँ अपनी पहली सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे करीबी लड़ाई ऊसुडु, पुडुचेरी में रही, जिसका फ़ैसला सिर्फ़ 164 वोटों से हुआ — उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा)।
इसी सीट पर इस चुनाव में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार भी थे: मतपत्र पर 12 नाम।
बुस्सी, पुडुचेरी में इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, 45.1% — और इसी सीट पर उस साल सभी सीटों में सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी दर्ज हुआ: 51.0%।
पृष्ठभूमि
पुडुचेरी की विधान सभा में शायद ही कभी कोई एक पार्टी हावी होती है, और यह चुनाव भी अलग नहीं था।
निर्दलीयों को एक समूह गिनें तो 7 दलों ने कम से कम एक सीट जीती; निर्दलीयों को 2 सीटें मिलीं।