चुनाव की कहानी
क्या हुआ
एन. रंगसामी ने ऑल इंडिया एन. आर. कांग्रेस को पुडुचेरी में सत्ता का एक और कार्यकाल दिलाया।1
उसने अपने दम पर 12 सीटें जीतीं, जो 16 सीटों के आँकड़े से कम थीं।
उसके (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) गठबंधन ने प्रदेश की 30 में से 18 सीटों के साथ बहुमत हासिल किया।
उसे 23.1% वोट मिले, फिर भी उसे 40.0% सीटें मिलीं।
अगले स्थान पर द्रविड़ मुन्नेत्र कड़गम रही, जिसे 13.7% वोट पर 5 सीटें मिलीं।
चुनाव प्रचार
भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च 2026 को पुडुचेरी विधान सभा चुनाव का कार्यक्रम घोषित किया, जिसमें मतदान 9 अप्रैल और मतगणना 4 मई को तय हुई।2
पाँच दिन बाद एआईएनआरसी की अगुवाई वाले एनडीए ने सीटों का बँटवारा तय किया: एआईएनआरसी को 16 सीटें, भाजपा को 10, और अन्नाद्रमुक और लच्चिय जननायक कच्ची को 2-2 सीटें। गठबंधन की अगुवाई कर रहे मौजूदा मुख्यमंत्री एन. रंगसामी ने दो सीटों, मंगलम और थट्टांचावडी, से नामांकन भरा।31
22 मार्च को अभिनेता से नेता बने विजय की अगुवाई वाले तमिलगा वेट्री कड़गम ने सभी 30 सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा की; वह दोनों मुख्य गठबंधनों से अलग, अपने दम पर लड़ रहा था।4
अगले दिन इंडियन नेशनल कांग्रेस और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम ने सेक्युलर प्रोग्रेसिव गठबंधन के लिए अपना सीट-बँटवारा तय किया: कांग्रेस 17 और द्रमुक 13 सीटों पर लड़ेगी। एक दिन बाद सीटों के बँटवारे से नाराज़ होकर विडुथलाई चिरुथैगल कच्ची गठबंधन से बाहर निकल गई। 6 अप्रैल को उसने फ़ैसला बदला और ओलगरेट को छोड़कर, जहाँ उसने अपना उम्मीदवार बनाए रखा, हर जगह गठबंधन के उम्मीदवारों का समर्थन करने पर राज़ी हो गई।567
क्या बदला
इस चुनाव में एआईएनआरसी ने पुडुचेरी की सरकार पर अपनी पकड़ आगे बढ़ाई।
उसकी अपनी सीटें 10 से बढ़कर 12 हो गईं।
इससे उसकी जीत का सिलसिला लगातार 2 चुनावों तक पहुँच गया।
सबसे बड़ा अकेला बदलाव निर्दलीय से एआईएनआरसी की ओर रहा: पूरे प्रदेश में पार्टी बदलने वाली 20 सीटों में से 3।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) पिछले चुनाव के मुक़ाबले 9.5 प्रतिशत अंक बढ़ा — यह पुडुचेरी में अब तक का सबसे ऊँचा मतदान प्रतिशत है।
अहम आँकड़े
राज भवन, पुडुचेरी में इस चुनाव का सबसे करीबी मुक़ाबला हुआ: विजेता का (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) 287 वोट था।
इस चुनाव में सबसे बड़ा जीत का अंतर थिरुनल्लार, पुडुचेरी में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 34.1% वोट आगे रहा।
किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत बाहूर, पुडुचेरी में दर्ज हुआ, जहाँ 95.8% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पंजीकृत मतदाताओं के हिसाब से विल्लियनूर, पुडुचेरी सबसे बड़ा निर्वाचन क्षेत्र था, जिसकी मतदाता सूची में 42,884 नाम थे।
ओझुकरई (ओऴुकरई), पुडुचेरी में पूरे प्रदेश में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार थे: मतपत्र पर 14 नाम।
पूरे प्रदेश में (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) को 6,633 वोट मिले, यानी डाले गए सभी वोटों का 0.8%।
पृष्ठभूमि
फ़्रांस के पुराने इलाक़े पुडुचेरी, कराईकल, माहे और यानम 1 जुलाई 1963 को पुडुचेरी केंद्र शासित प्रदेश बने, जिसकी 30 सदस्यों वाली एक निर्वाचित विधान सभा थी।8
एन. रंगसामी ने 7 फ़रवरी 2011 को इंडियन नेशनल कांग्रेस छोड़कर एआईएनआरसी बनाई, और उसी साल इस नई पार्टी ने अन्नाद्रमुक के साथ गठबंधन में सबसे ज़्यादा सीटें जीतीं।9
फ़रवरी 2021 में विधान सभा में विश्वास मत हारने के बाद पुडुचेरी की कांग्रेस की अगुवाई वाली सरकार गिर गई, और उस साल के चुनाव से पहले उसी दिन मुख्यमंत्री वी. नारायणसामी की मंत्रिपरिषद ने इस्तीफ़ा दे दिया।10