कांग्रेस की सत्ता में वापसी
क्या हुआ
राज्य में सत्ता फिर बदली, और इस बार उस पार्टी के पास लौटी जो पूर्ण राज्य बनने से पहले सरकार चला रही थी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 40 सीटों में से 23 सीटें जीतीं, हर लिहाज़ से यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह 21 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 2 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी मिजो नेशनल फ्रंट ने 14 सीटें जीतीं।
क्या बदला
पिछले चुनाव पर छाई निर्दलीयों की लहर जितनी तेज़ी से आई थी, लगभग उतनी ही तेज़ी से ढह गई।
अब तक अपने उम्मीदवार सिर्फ़ निर्दलीय के रूप में उतारने वाले आंदोलन एमएनएफ ने पहली बार अपने नाम से यह चुनाव लड़ा।
अकेले निर्दलीय से एमएनएफ के पास 13 सीटें चली गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला लुंगलेई दक्षिण, मिज़ोरम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 15 वोट रहा।
दूसरी ओर, चोंगते, मिज़ोरम में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 42.2% वोटों से आगे रहा।
पूरे राज्य में लगभग 80.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला; यह तब तक मिज़ोरम में दर्ज सबसे ऊँचा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) था।
सबसे भरा हुआ बैलट त्लाबुंग, मिज़ोरम में था, जहाँ 6 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह मतदान उन वर्षों में हुआ जब शांति और पूर्ण राज्य के दर्जे ने राज्य की राजनीति को अभी-अभी नया रूप दिया था।