कांग्रेस को दूसरा कार्यकाल
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने भारी जीत के साथ दूसरा कार्यकाल जीता और राज्य विधान सभा पर अपनी पकड़ और मज़बूत की।
कांग्रेस ने 40 सीटों में से 34 सीटें जीतीं।
मिजो नेशनल फ्रंट सिर्फ़ 5 सीटों के साथ बहुत पीछे रह गई।
यह राज्य में अब तक पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन था।
क्या बदला
वोट डालने वाले पंजीकृत मतदाताओं का हिस्सा भी ऐसे स्तर पर पहुँचा, जो न पहले कभी छुआ गया था, न बाद में।
उस साल (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 83.0% रहा।
यह मिज़ोरम का पहला चुनाव भी था जिसमें (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) का विकल्प था।
3,810 मतदाताओं ने नोटा चुना, यानी उस साल के कुल वोटों का लगभग 0.7%।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ और आँकड़े भी ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: तुईकुम, मिज़ोरम का फ़ैसला सिर्फ़ 14 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, तुईचोंग, मिज़ोरम में जीत का अंतर 41.4% वोट रहा।
सबसे कम मतदान प्रतिशत आइजोल उत्तर-I, मिज़ोरम में रहा, 79.1%।
सबसे ज़्यादा उम्मीदवारों वाली सीट, हाछेक, मिज़ोरम, में भी सिर्फ़ 5 उम्मीदवार थे, जबकि राज्य भर में औसतन हर सीट पर 3.5 उम्मीदवार थे।
पृष्ठभूमि
इस परिणाम से साफ़ हुआ कि मिज़ोरम की विधान सभा राजनीति कितनी कुछ दलों में सिमट गई थी।
उस साल सिर्फ़ 3 दलों ने सीटें जीतीं।