कांग्रेस बहुमत से पीछे
क्या हुआ
इस विधान सभा चुनाव में (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी।
इंडियन नेशनल कांग्रेस थोड़े अंतर से आगे निकली और कुल 40 सीटों में से 16 सीटें जीतीं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी मिजो नेशनल फ्रंट 14 सीटों के साथ ठीक पीछे रही।
दोनों में से कोई भी अकेले सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 21 सीटों के आँकड़े तक नहीं पहुँची।
क्या बदला
वही पार्टी आगे रही, पर इस बार अपने दम पर सरकार चलाने लायक सीटें उसके पास नहीं थीं।
कांग्रेस पिछले चुनाव की 23 सीटों से फिसलकर इस बार 16 सीटों पर आ गई।
इसके अलावा 10 सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलीं।
उस साल कुल 3 दलों ने सीटें जीतीं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला कोनपुई, मिज़ोरम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 18 वोट रहा।
दूसरी ओर, चोंगते, मिज़ोरम में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 36.5% वोटों से आगे रहा।
लोकीचेरा, मिज़ोरम में लगभग 88.1% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल राज्य की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे भरा हुआ बैलट लोकीचेरा, मिज़ोरम में था, जहाँ 7 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सत्ता में बनी रही, पर उसके पास वह स्पष्ट बहुमत नहीं था जो पिछले चुनाव के बाद था।