कांग्रेस को सत्ता
क्या हुआ
केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता फिर बदली, और इस बार एक साफ़ विजेता के हाथ गई।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 30 सीटों में से 20 सीटें जीतीं, हर लिहाज़ से यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे उसके पास बहुमत के लिए ज़रूरी 16 सीटों के आँकड़े से 4 सीटें ज़्यादा हो गईं।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी पीपुल्स काँफ्रेंस ने 8 सीटें जीतीं।
क्या बदला
पिछली सरकार का अपना समर्थन लगभग पूरी तरह ख़त्म हो गया।
पिछले चुनाव में सबसे आगे रही पीपुल्स काँफ्रेंस बुरी तरह ढह गई।
उस साल 3 दलों ने सीटें जीतीं, और 2 सीटें निर्दलीयों को मिलीं।
1 सीट बिना मुक़ाबले के जीती गई: वहाँ उम्मीदवार निर्विरोध चुना गया, क्योंकि सिर्फ़ एक ही उम्मीदवार था और फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
मतगणना का सबसे कड़ा मुक़ाबला आइजोल उत्तर, मिज़ोरम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 2 वोट रहा।
दूसरी ओर, फुलदुंगसेई, मिज़ोरम में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 19.5% वोटों से आगे रहा।
कोनपुई, मिज़ोरम में लगभग 87.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल केंद्र शासित प्रदेश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे भरा हुआ बैलट संगाउ, मिज़ोरम में था, जहाँ 9 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव भी उसी केंद्र शासित प्रदेश व्यवस्था के तहत हुआ, जिसके तहत मिज़ोरम शुरू से चल रहा था।