मिजो नेशनल फ्रंट सत्ता में बना रहा
क्या हुआ
मिजो नेशनल फ्रंट ने सत्ता बनाए रखी और वोटों में कड़ी टक्कर देने वाले प्रतिद्वंद्वी को पीछे छोड़ा।
एमएनएफ ने 21 सीटें जीतीं, पिछले चुनाव जितनी ही।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में इंडियन नेशनल कांग्रेस बस थोड़ा ही पीछे रही: उसे 30.1% वोट मिले, जबकि एमएनएफ को 31.7%।
पर सीटें उसे बहुत कम मिलीं: 12।
क्या बदला
पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रही पार्टी इस बार लगभग पूरी तरह पिछड़ गई।
पिछली बार मिजोरम पीपुल्स काँफ्रेंस का साथ देने वाले 6 निर्वाचन क्षेत्र इस बार कांग्रेस के पास चले गए; यह इस चुनाव का सबसे बड़ा बदलाव था।
एमएनएफ की अपनी स्थिति लगभग वैसी ही रही: उसकी सीटें 21 से 21 हुईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला: खोजोल, मिज़ोरम का फ़ैसला सिर्फ़ 20 वोटों से हुआ, जो उस साल पूरे राज्य में सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरे छोर पर, सुआंगपुईलोन, मिज़ोरम में जीत का अंतर 61.2% वोट रहा, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे बड़ा था।
वानवा, मिज़ोरम में लगभग 89.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल राज्य की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
राज्य में सबसे ज़्यादा उम्मीदवार लॉन्गतलाई, मिज़ोरम में उतरे, कुल 7।
पृष्ठभूमि
मिज़ोरम विधान सभा में सत्ता उन्हीं प्रतिद्वंद्वी पार्टियों के बीच घूमती रही, जैसा पूर्ण राज्य बनने के शुरुआती वर्षों से होता आया था।