पीपुल्स काँफ्रेंस को सत्ता
क्या हुआ
एक नई क्षेत्रीय पार्टी ने अपने पहले ही चुनाव में सत्ता जीत ली और मैदान में उतरते ही लगभग फ़ौरन सरकार बना ली।
पीपुल्स काँफ्रेंस ने कुल 30 सीटों में से 22 सीटें जीतीं, हर लिहाज़ से यह एकतरफ़ा जीत थी।
इससे वह 16 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 6 सीटें आगे रही।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय ने 8 सीटें जीतीं।
क्या बदला
यह शानदार शुरुआत थी: इस चुनाव में जीतने वाली पार्टी पिछले चुनाव के समय थी ही नहीं।
उसकी सीटें 0 से बढ़कर 22 हो गईं, जो आराम से बहुमत के लिए काफ़ी से ज़्यादा थीं।
आख़िर में 2 दलों ने सीटें जीतीं, और बाक़ी सीटें निर्दलीय उम्मीदवारों को मिलीं।
केंद्र शासित प्रदेश की 30 सीटों पर कुल 154 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला कोर्थाह, मिज़ोरम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 51 वोट रहा।
दूसरी ओर, बुआरपुई, मिज़ोरम में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 64.2% वोटों से आगे रहा।
सुआंगपुईलोन, मिज़ोरम में लगभग 81.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल केंद्र शासित प्रदेश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे भरा हुआ बैलट कोर्थाह, मिज़ोरम में था, जहाँ 9 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
उस समय मिज़ोरम की राजनीति इस बात से तय हो रही थी कि एक बड़ा आंदोलन अब भी मतपत्र से बाहर था।