पीपुल्स काँफ्रेंस सत्ता में बनी रही
क्या हुआ
केंद्र शासित प्रदेश में सरकार चला रही पार्टी सत्ता में बनी रही, हालाँकि विधान सभा में उसका हिस्सा पहले से छोटा था।
पीपुल्स काँफ्रेंस ने कुल 30 सीटों में से 18 सीटें जीतीं।
यह फिर भी 16 सीटों के बहुमत के आँकड़े से 2 सीटें ऊपर था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय ने 5 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस चुनाव में पहली बार राष्ट्रीय राजनीति की फूट भी केंद्र शासित प्रदेश के अपने मतपत्र पर दिखी।
पहली बार विधान सभा में सीटें जीतने वाले नए दल थे: जनता पार्टी।
पीपुल्स काँफ्रेंस की अपनी सीटें 22 से घटकर 18 रह गईं।
अकेले निर्दलीय से इंडियन नेशनल कांग्रेस (इंदिरा) के पास 4 सीटें चली गईं।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला देमागिरी, मिज़ोरम में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 21 वोट रहा।
दूसरी ओर, बुआरपुई, मिज़ोरम में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 67.9% वोटों से आगे रहा।
सुआंगपुईलोन, मिज़ोरम में लगभग 79.4% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला, जो उस साल केंद्र शासित प्रदेश की किसी भी सीट पर सबसे ज़्यादा था।
सबसे भरा हुआ बैलट चोंगते, मिज़ोरम में था, जहाँ 8 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव भी पिछले चुनाव की तरह केंद्र शासित प्रदेश की व्यवस्था के तहत हुआ।
मिज़ोरम की विधान सभा में 30 सीटें ही रहीं, पिछले चुनाव की 30 सीटों के बराबर।