छत्तीसगढ़ का पहला चुनाव
क्या हुआ
अलग राज्य बनने के बाद यह छत्तीसगढ़ का पहला विधान सभा चुनाव था, और मुक़ाबला क़रीबी रहा।
भारतीय जनता पार्टी ने कुल 90 सीटों में से 50 सीटें जीतीं।
उसके (कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) सिर्फ़ 39.3% रहा।
इंडियन नेशनल कांग्रेस 36.7% मतों के हिस्से के साथ ठीक पीछे रही।
क्या बदला
इस चुनाव से छत्तीसगढ़ ने एक अलग राजनीतिक इकाई के रूप में शुरुआत की, और उसकी नई विधान सभा के लिए पहली बार प्रतिनिधि चुने गए।
उस पहले मुक़ाबले में 4 दलों ने सीटें जीतीं, जिनमें से ज़्यादातर सीटें भाजपा और कांग्रेस ने आपस में बाँटीं।
मैदान भीड़ भरा था: राज्य की 90 सीटों पर 819 उम्मीदवारों ने चुनाव लड़ा।
अहम आँकड़े
उस पहले चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 40 वोट रहा।
दूसरी ओर, मरवाही, छत्तीसगढ़ में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 49.5% वोटों से आगे रहा।
सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) बीजापुर, छत्तीसगढ़ में रहा, सिर्फ़ 37.1%।
उस साल सबसे ज़्यादा मतदाता रायपुर ग्रामीण, छत्तीसगढ़ में थे, कुल 3,41,682 पंजीकृत मतदाता।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव जब हुआ, तब छत्तीसगढ़ को राज्य बने कुछ ही समय हुआ था।