छत्तीसगढ़ में यथास्थिति
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ में सत्ता बरकरार रखी और ऐसी चुनौती को पीछे छोड़ा जो थोड़े से फ़र्क़ से चूक गई।
भाजपा ने 90 सीटों में से 50 सीटें जीतीं।
यह 46 सीटों के बहुमत के आँकड़े से आराम से ऊपर था।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में इंडियन नेशनल कांग्रेस थोड़ा ही पीछे रही, 40.3% के मुक़ाबले 38.6%।
क्या बदला
यह चुनाव सरकार बदलने के लिए नहीं, बल्कि इस बात के लिए याद रखने लायक़ था कि कितना कम बदला।
भाजपा ठीक उतनी ही 50 सीटों के साथ लौटी, जितनी उसने पिछली बार जीती थीं — बिल्कुल एक जैसा परिणाम।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) थोड़ा ही घटा; 0.7 प्रतिशत अंक के बदलाव के साथ यह 70.6% पर आ गया।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला अंतागढ़, छत्तीसगढ़ में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 109 वोट रहा।
दूसरी ओर, मरवाही, छत्तीसगढ़ में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 34.9% वोटों से आगे रहा।
सबसे कम मतदान प्रतिशत बीजापुर, छत्तीसगढ़ में रहा, सिर्फ़ 29.2%।
सबसे भरा हुआ बैलट भटगांव, छत्तीसगढ़ में था, जहाँ 29 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
यह अब भी एक नया राज्य था, जिसका पहला आम चुनाव हुए ज़्यादा समय नहीं हुआ था।