सत्ता बची, पर बहुत कम अंतर से
क्या हुआ
भारतीय जनता पार्टी छत्तीसगढ़ में फिर जीती, हालाँकि दूसरे स्थान पर रही पार्टी पर उसकी बढ़त लगभग ख़त्म हो गई।
भाजपा ने 90 सीटों में से 49 सीटें हासिल कीं।
इससे वह बहुमत की रेखा से सिर्फ़ 3 सीटें आगे रही।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में इंडियन नेशनल कांग्रेस थोड़ा ही पीछे रही, 41.0% के मुक़ाबले 40.3%।
क्या बदला
भाजपा ने छत्तीसगढ़ में एक बार फिर अपनी जीत का सिलसिला जारी रखा।
अब वह राज्य में लगातार 3 चुनाव जीत चुकी थी।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) 6.8 प्रतिशत अंक बढ़कर 77.4% हो गया, जो अब तक के किसी भी छत्तीसगढ़ चुनाव में सबसे ज़्यादा था।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
यह छत्तीसगढ़ का पहला चुनाव था जिसमें मतदाता (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) चुन सकते थे, और 4,01,058 मतदाताओं ने नोटा चुना — कुल वोटों का 3.1%।
सबसे कड़ा मुक़ाबला तखतपुर, छत्तीसगढ़ में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 608 वोट रहा।
दूसरी ओर, मरवाही, छत्तीसगढ़ में सबसे एकतरफ़ा मुक़ाबला हुआ, जहाँ विजेता 32.8% वोटों से आगे रहा।
सबसे भरा हुआ बैलट रायपुर नगर दक्षिण, छत्तीसगढ़ में था, जहाँ 38 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
उस साल छत्तीसगढ़ का मुक़ाबला मुख्य रूप से उसके दो बड़े राष्ट्रीय दलों के बीच सिमट गया।