भाजपा ने त्रिपुरा बचाया, टिपरा मोथा बनी नया विपक्ष

त्रिपुरा विधान सभा का नक्शा लोड हो रहा है…

चुनाव की कहानी

क्या हुआ

भारतीय जनता पार्टी का त्रिपुरा की सत्ता में बना रहा, हालाँकि उसका अपना बहुमत घट गया।

उसने अपने दम पर 60 सीटों में से 32 सीटें जीतीं।

इससे वह आधे के आँकड़े से 1 सीट ऊपर रही।

पहली बार चुनाव लड़ रही टिपरा मोथा पार्टी 13 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही।

चुनाव प्रचार

प्रद्योत बिक्रम माणिक्य देब बर्मा ने 5 फ़रवरी 2021 को टिपरा मोथा बनाई, जो इलाक़े के मूल निवासी समुदायों के लिए ‘ग्रेटर टिपरालैंड’ नाम के अलग राज्य या स्वायत्त क्षेत्र की माँग के साथ अभियान चला रही थी।1

चुनाव से पहले एनडीए के आठ मौजूदा विधायकों ने गठबंधन छोड़ दिया — चार टिपरा मोथा में, तीन कांग्रेस में और एक तृणमूल कांग्रेस में शामिल हुए। 12 नवंबर 2022 को अगरतला की एक रैली में टिपरा मोथा के नेता प्रद्योत किशोर देबबर्मा ने कहा कि ग्रेटर टिपरालैंड की माँग पर कोई समझौता नहीं होगा, और पार्टी ने आगे चलकर 42 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ा।23

भाजपा ने इंडीजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के साथ अपना गठबंधन दोहराया और उसे 60 में से 6 सीटें दीं, लेकिन आईपीएफटी की अलग राज्य की माँग का विरोध जारी रखा। माकपा और कांग्रेस ने आपस में सीटों के बँटवारे का समझौता किया: माकपा 43 सीटों पर, कांग्रेस 13 पर और सहयोगी दल 4 पर।45

प्रचार के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने टिपरा मोथा पर भाजपा के ख़िलाफ़ कांग्रेस और माकपा से गठबंधन करने का आरोप लगाया। देबबर्मा ने इस दावे को नकारते हुए कहा कि राजपरिवार से होने के कारण वे कम्युनिस्ट पार्टियों से कोई गठबंधन नहीं कर सकते।6

स्रोत
  1. 1 wikipedia.org
  2. 2 wikipedia.org
  3. 3 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)
  4. 4 wikipedia.org
  5. 5 wikipedia.org
  6. 6 wikipedia.org

क्या बदला

इस चुनाव में सबसे साफ़ हलचल विपक्ष के भीतर थी: सत्ताधारी गठबंधन का छोटा सहयोगी बुरी तरह ढह गया और एक बिलकुल नई पार्टी ने उसकी जगह ले ली।

जिन 30 सीटों पर पार्टी बदली, उनमें से 8 सीटें इंडीजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा से टिपरा मोथा पार्टी के पास गईं।

भाजपा की अपनी सीटें इस बार 36 से घटकर 32 रह गईं।

पिछले चुनाव के मुक़ाबले 3.8 प्रतिशत अंक गिरा।

अहम आँकड़े

इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला जुबराजनगर, त्रिपुरा में हुआ: 296 वोट था।

सबसे बड़ा जीत का अंतर टाकारजला, त्रिपुरा में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 81.2% वोट आगे रहा।

मनु, त्रिपुरा में किसी भी सीट से ज़्यादा मतदान प्रतिशत दर्ज हुआ, 92.1%।

पूरे राज्य में को 34,449 वोट मिले, यानी कुल वोटों का 1.4%।

पृष्ठभूमि

भारतीय जनता पार्टी और इंडीजेनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा के गठबंधन ने 2018 में पहली बार त्रिपुरा की सत्ता जीती थी, और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्ससिस्ट) के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार के लगातार 25 साल ख़त्म किए थे।7

स्रोत
  1. 7 wikipedia.org (1) wikipedia.org (2)