मैसूर 1962 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 138 सीटें (66.3%)IND: 27 सीटें (13.0%)PSP: 20 सीटें (9.6%)SWA: 9 सीटें (4.3%)MES: 6 सीटें (2.9%)LSS: 4 सीटें (1.9%)CPI: 3 सीटें (1.4%)SOC: 1 सीट (0.5%)बहुमत के लिए 105208सरकार बनाने के लिए 105
  • INC13866.3%
  • निर्दलीय2713.0%
  • PSP209.6%
  • SWA94.3%
  • MES62.9%
  • LSS41.9%
  • CPI31.4%
  • SOC10.5%
चुनाव की कहानी

कांग्रेस की लगातार तीसरी जीत

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस मैसूर में फिर जीती और एक और कार्यकाल के लिए सत्ता में बनी रही।

कांग्रेस ने कुल 208 सीटों में से 138 सीटें जीतीं।

यह पिछली बार की 150 सीटों से कम था, हालाँकि बाक़ी सबसे वह अब भी आराम से आगे थी।

उसके सबसे क़रीबी निर्दलीय प्रतिद्वंद्वी भी पिछड़े और 27 सीटों पर आ गए।

क्या बदला

इस बार मैसूर का राजनीतिक नक्शा वैसा ही रहा, और कांग्रेस की जीत का सिलसिला बस जारी रहा।

अब वह राज्य में लगातार 3 चुनाव जीत चुकी है।

विपक्ष भी कमज़ोर पड़ा: पिछले चुनाव के मुक़ाबले निर्दलीय उम्मीदवारों के में -11.4 प्रतिशत अंक का बदलाव आया।

अहम आँकड़े

उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: हुलसूर, मैसूर में सिर्फ़ 38 रहा।

दूसरी ओर, रायबाग, मैसूर में विजेता ने दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 78.6% वोटों के अंतर से हराया।

सबसे ज़्यादा मतदाता सागर, मैसूर में थे, जहाँ 79,194 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला बीजापुर, मैसूर में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 9 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

इस चुनाव को बदलाव के बजाय निरंतरता के रूप में देखना बेहतर है: इसने राज्य में उसी पार्टी के बहुमतों का सिलसिला आगे बढ़ाया।

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