कांग्रेस के लिए कड़ा मुक़ाबला
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस मैसूर में फिर जीती, हालाँकि उसका बहुमत पहले के चुनावों से छोटा था।
कांग्रेस ने कुल 216 सीटों में से 126 सीटें जीतीं।
फिर भी यह बहुमत के लिए ज़रूरी सीटों से 17 सीटें ज़्यादा था।
उसके सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी, बिखरे हुए निर्दलीय उम्मीदवार, इस बार आगे बढ़े और 41 सीटों तक पहुँचे।
क्या बदला
इस बार विधान सभा फिर बड़ी हुई और नक्शे में कुछ नई सीटें जुड़ीं।
सीटें 208 से बढ़कर 216 हो गईं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी पूरे दौर में अपने सबसे ऊँचे स्तर पर पहुँचा।
इस बार राज्य के 62.5% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला।
पार्टी अब राज्य में लगातार 4 चुनाव जीत चुकी थी।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: हुलियूरदुर्ग, मैसूर में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 76 रहा।
दूसरी ओर, बागेवाडी, मैसूर में विजेता ने दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 80.2% वोटों के अंतर से हराया।
सबसे ज़्यादा मतदाता मल्लेश्वरम, मैसूर में थे, जहाँ 86,499 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला गांधीनगर, मैसूर में था, जहाँ एक ही सीट के लिए 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
कोई एक घटना अकेले इस चुनाव की पहचान नहीं है; इसने बस राज्य में उसी पार्टी के बहुमतों का सिलसिला आगे बढ़ाया।