मैसूर का पहला चुनाव
क्या हुआ
मैसूर के पहले आम चुनाव में एक ही पार्टी ने भारी जीत दर्ज की।
इंडियन नेशनल कांग्रेस ने कुल 99 सीटों में से 74 सीटें जीतीं।
उसके सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी बिखरे हुए निर्दलीय उम्मीदवार थे, जिन्होंने कुल मिलाकर 11 सीटें जीतीं।
फिर भी उसे सिर्फ़ 46.4% वोट मिले।
क्या बदला
यह मैसूर का पहला आम चुनाव था, और कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में बहु-सदस्यीय व्यवस्था थी: एक मुक़ाबले से एक से ज़्यादा सदस्य विधान सभा में जाते थे।
इनमें एक सामान्य सीट के साथ एक ऐसी सीट जोड़ी जाती थी जो अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार के लिए आरक्षित होती थी।
80 निर्वाचन क्षेत्रों में से 19 इसी तरह काम करते थे।
कुल मिलाकर विधान सभा में 99 सदस्य थे।
अहम आँकड़े
उस पहले चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: तरीकेरे, मैसूर में (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 34 रहा।
दूसरी ओर, बंगारपेट, मैसूर में विजेता ने दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 53.9% वोटों के अंतर से हराया।
सबसे ज़्यादा मतदाता बंगलौर उत्तर, मैसूर में थे, जहाँ 96,085 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।
सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला कोलार गोल्ड फील्ड्स, मैसूर में था, जहाँ 12 उम्मीदवार मैदान में थे।
पृष्ठभूमि
जीतने वाली पार्टी अकेली नहीं थी: कई छोटे दलों और निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी सीटें जीतीं।