मैसूर 1957 का नक्शा लोड हो रहा है…
पार्टी के हिसाब से सीटें
INC: 150 सीटें (72.1%)IND: 35 सीटें (16.8%)PSP: 18 सीटें (8.7%)PWP: 2 सीटें (1.0%)SCF: 2 सीटें (1.0%)CPI: 1 सीट (0.5%)बहुमत के लिए 105208सरकार बनाने के लिए 105
  • INC15072.1%
  • निर्दलीय3516.8%
  • PSP188.7%
  • PWP21.0%
  • SCF21.0%
  • CPI10.5%
चुनाव की कहानी

मैसूर की बड़ी हुई विधान सभा

क्या हुआ

इंडियन नेशनल कांग्रेस ने मैसूर की नई बड़ी हुई विधान सभा में सत्ता बनाए रखी और फिर आराम से जीती।

कांग्रेस ने कुल 208 सीटों में से 150 सीटें जीतीं।

इस तरह वह बहुमत के लिए ज़रूरी आँकड़े से 45 सीटें आगे रही।

उसके सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी फिर से बिखरे हुए निर्दलीय उम्मीदवार थे, जिन्हें 35 सीटें मिलीं।

क्या बदला

पड़ोस के कन्नड़-भाषी इलाक़ों के राज्य में मिलने के बाद मैसूर के बड़े नक्शे पर यह पहला चुनाव था।

मतदान से पहले ने विधान सभा का रूप बदल दिया।

सीटें 99 से बढ़कर 208 हो गईं।

नई सीटों में से 6 पर उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए: इन सीटों पर सिर्फ़ एक उम्मीदवार था, इसलिए फ़ैसले के लिए मतदान की ज़रूरत नहीं पड़ी।

अहम आँकड़े

बड़े हुए राज्य के उस पहले चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।

सबसे क़रीबी मुक़ाबला: जेवर्गी, मैसूर में सिर्फ़ 100 रहा।

दूसरी ओर, हावेरी, मैसूर में विजेता ने दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार को 76.2% वोटों के अंतर से हराया।

सबसे ज़्यादा मतदाता चल्लकेरे, मैसूर में थे, जहाँ 1,13,172 लोग वोट देने के लिए पंजीकृत थे।

सबसे भीड़ वाला मुक़ाबला होन्नाली, मैसूर में था, जहाँ 8 उम्मीदवार मैदान में थे।

पृष्ठभूमि

यह चुनाव दक्षिण भारत में राज्यों की सीमाओं के बड़े पुनर्गठन के बाद हुआ।

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