चुनाव की कहानी
क्या हुआ
2019 में सीटों की गिनती में सबसे आगे रही पार्टी इस साल भी सबसे आगे रही, हालाँकि अकेले अपने दम पर नहीं।
भारतीय जनता पार्टी ने 132 सीटें जीतीं, जो 145 सीटों के बहुमत के आँकड़े से कम थीं।
इसके बजाय इसका (दलों का ऐसा समूह जो मिलकर चुनाव लड़ता है, और सब मिलाकर काफ़ी सीटें जीतने पर सत्ता में साझेदारी करता है) महायुति 235 सीटों तक पहुँचा।
क्या बदला
इस साल सीटें जीतने वालों में दो नए पार्टी नाम पहली बार दिखे।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और नेशनलिस्ट काँग्रेस पार्टी- शरदचंद्र पवार, दोनों पुरानी पार्टियों से टूटकर बने गुट हैं, और दोनों ने इस साल पहली बार महाराष्ट्र में सीटें जीतीं।
सबसे बड़ा बदलाव इंडियन नेशनल कांग्रेस से भाजपा की ओर रहा: 16 निर्वाचन क्षेत्र इसी तरह बदले।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
सबसे क़रीबी मुक़ाबला: मालेगांव मध्य, महाराष्ट्र का फ़ैसला सिर्फ़ 162 वोटों से हुआ, जो उस साल किसी भी सीट पर सबसे कम (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) था।
दूसरी ओर, सतारा, महाराष्ट्र में जीत का अंतर 64.6% वोट रहा, जो इस चुनाव में सबसे बड़ा था।
सबसे ज़्यादा (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) करवीर, महाराष्ट्र में रहा, 85.7%।
4,61,886 मतदाताओं ने (इनमें से कोई नहीं (नोटा) — मतपत्र का वह विकल्प, जिससे मतदाता सामने खड़े सभी उम्मीदवारों को औपचारिक रूप से नकार सकते हैं) चुना, जो पूरे राज्य के वोटों का 0.7% था।
पृष्ठभूमि
यह चुनाव राज्य की सबसे पुरानी पार्टियों में से एक के दो प्रतिद्वंद्वी गुटों में टूटने के बाद पहला चुनाव था।