निर्दलीयों का दौर ख़त्म
क्या हुआ
एक नई क्षेत्रीय पार्टी की अगुवाई में राजनीतिक दल पहली बार नागालैंड विधान सभा में पहुँचे।
नागालैंड नेशनलिस्ट ऑर्गनाइजेशन ने नागालैंड की 40 सीटों में से 22 सीटें जीतीं।
यह 21 सीटों के बहुमत के आँकड़े से सिर्फ़ 1 सीट ज़्यादा था।
उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी यूनाइटेड फ्रंट ऑफ नागालैंड ने 10 सीटें जीतीं।
क्या बदला
इस बार सबसे आगे रही पार्टी पिछले चुनाव के समय थी ही नहीं; तब निर्दलीय उम्मीदवार आगे थे।
नागालैंड नेशनलिस्ट ऑर्गनाइजेशन की सीटें 0 से 22 हो गईं।
निर्दलीय उम्मीदवारों की संख्या बुरी तरह घटी और 40 में से सिर्फ़ 8 सीटें उनके पास रहीं।
(पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला) भी तेज़ी से बढ़ा।
यह 28.1 प्रतिशत अंक बढ़कर 78.2% हो गया।
अहम आँकड़े
उस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला आओंगलेंडेन, नागालैंड में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 8 वोट रहा।
दूसरी ओर, दीमापुर, नागालैंड में मतगणना का सबसे बड़ा जीत का अंतर रहा, जहाँ विजेता 63.7% वोटों से आगे रहा।
सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत तुली, नागालैंड में रहा, 99.4%।
सबसे ज़्यादा मतदाता दीमापुर टाउन, नागालैंड में थे, जहाँ 7,917 लोग वोट डालने के लिए पंजीकृत थे।
पृष्ठभूमि
पूर्ण राज्य बनने के बाद यह राज्य का दूसरा चुनाव था।