कांग्रेस का अब तक का सबसे बड़ा बहुमत
क्या हुआ
इंडियन नेशनल कांग्रेस आराम से सत्ता में बनी रही और सीटों का बड़ा हिस्सा जीता।
कांग्रेस ने 60 सीटों में से 53 सीटें जीतीं।
इससे उसके पास बहुमत के लिए ज़रूरी संख्या से 22 सीटें ज़्यादा थीं।
(कुल डाले गए वोटों का वह हिस्सा जो किसी एक पार्टी या उम्मीदवार को मिला) में उसकी सबसे क़रीबी प्रतिद्वंद्वी निर्दलीय थी, जिसे 49.3% वोट मिले, पर सीटें सिर्फ़ 7।
क्या बदला
यह चुनाव राज्य की अपनी क्षेत्रीय पार्टी के लिए तेज़ उलटफेर लेकर आया।
सबसे ज़्यादा नुक़सान नागालैंड पीपुल्स काउंसिल को हुआ: उसकी 14 सीटें सीधे कांग्रेस के पास चली गईं।
इस चुनाव में निर्दलीयों ने कुल मिलाकर 7 सीटें जीतीं; उनके वोट किसी एक पार्टी में सिमटने के बजाय कई उम्मीदवारों में बँटे रहे।
अहम आँकड़े
इस चुनाव के कुछ आँकड़े अलग से ध्यान खींचते हैं।
सबसे कड़ा मुक़ाबला तिजित, नागालैंड में हुआ, जहाँ फ़ैसला सिर्फ़ 247 वोटों से हुआ।
इसके उलट, सबसे बड़ा (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) दीमापुर-III, नागालैंड में रहा, जहाँ विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से 70.6% वोट आगे रहा।
उस साल सबसे ज़्यादा उम्मीदवारों वाली सीट थोनोकन्यू, नागालैंड में भी मतपत्र पर सिर्फ़ 4 उम्मीदवार थे; इससे पता चलता है कि पूरे राज्य में मुक़ाबले में कितने कम उम्मीदवार थे।
उस साल सिर्फ़ लगभग 22.0% पंजीकृत मतदाताओं ने वोट डाला; राज्य की 60 सीटों में से 43 का फ़ैसला पहले ही बिना मतदान के हो चुका था।
पृष्ठभूमि
कांग्रेस के लिए यह नई स्थिति नहीं थी: वह कुछ समय से लगातार जीत रही थी।
इस चुनाव तक कांग्रेस नागालैंड में लगातार 5 चुनाव जीत चुकी थी।