दो पार्टियाँ बराबर, किसी को बहुमत नहीं
क्या हुआ
दोनों प्रमुख पार्टियों की सीटें बराबर रहीं, और कोई भी अकेले बहुमत का दावा नहीं कर सकती थी।
60 सीटों में से इंडियन नेशनल कांग्रेस और नागा नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी दोनों को बराबर, 24 सीटें मिलीं।
इससे (ऐसा परिणाम जिसमें किसी एक पार्टी को अकेले सरकार बनाने लायक सीटें नहीं मिलतीं) विधान सभा बनी, जो 31 सीटों के बहुमत के आँकड़े से काफ़ी पीछे थी।
क्या बदला
पिछले चुनाव से सरकार चला रही पार्टी का समर्थन बुरी तरह गिरा और एक नई प्रतिद्वंद्वी ने उसकी ज़मीन ले ली।
पिछली विजेता यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट की जगह नई सरकार आई।
कांग्रेस की सीटें 15 से बढ़कर 24 हो गईं।
एक नई पार्टी, नागा नेशनल डेमोक्रेटिक पार्टी, मैदान में आई और ठीक उसकी बराबरी कर ली: उसे भी 24 सीटें मिलीं।
अहम आँकड़े
चुनाव परिणामों के कुछ आँकड़े अपने आप में ध्यान खींचते हैं।
इस चुनाव का सबसे कड़ा मुक़ाबला जांगपेटकोंग, नागालैंड में हुआ, जहाँ (विजेता दूसरे स्थान पर रहे उम्मीदवार से कितने वोटों से आगे रहा) सिर्फ़ 39 वोट रहा।
प्रतिशत के हिसाब से इस चुनाव का सबसे बड़ा जीत का अंतर दीमापुर-III, नागालैंड में रहा, 40.3%।
दीमापुर-II, नागालैंड तीन बातों में अलग दिखी: किसी भी सीट में सबसे कम (पंजीकृत मतदाताओं में से कितने प्रतिशत ने असल में वोट डाला), 43.1%; सबसे ज़्यादा मतदाता, 30,722 पंजीकृत मतदाता; और किसी भी मतपत्र पर सबसे ज़्यादा उम्मीदवार, कुल 10।
इसके उलट, इस चुनाव में सबसे ज़्यादा मतदान प्रतिशत तामलू, नागालैंड में दर्ज हुआ, 97.7%।
पृष्ठभूमि
इस चुनाव में भी नागालैंड में हर चुनाव के साथ सरकार बदलने का सिलसिला जारी रहा।